
संवाददाता
लखनऊ राजधानी सहित उत्तर प्रदेश में रेलवे के करीब 4311 पद सरेंडर किए जाएंगे। पदों को खत्म करने से रेलवे का कामकाज भी प्रभावित होगा। इसमें उत्तर, पूर्वोत्तर, उत्तर मध्य सहित अन्य रेलवे जोनों के पदों को खत्म किया जाएगा। इसके लिए अफसरों को तीन महीने के अंदर रेलवे बोर्ड को पदों की सूची भेजनी होगी। रेलवे बोर्ड ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में सभी रेलवे जोनों और उत्पादन इकाइयों में पदों के पुनर्वितरण(रिडिस्ट्रीब्यूशन) एवं सरेंडर का लक्ष्य निर्धारित किया है। वर्तमान में कार्यरत कुल

14,80,455 रेलकर्मियों की संख्या में दो प्रतिशत की कटौती होगी। इसका असर उत्तर प्रदेश पर भी पड़ेगा, जहां पद सरेंडर किए जाएंगे। दरअसल, उत्तर प्रदेश में उत्तर रेलवे, पूर्वोत्तर रेलवे, उत्तर मध्य रेलवे के अतिरिक्त राज्य के कुछ हिस्सों में पूर्व मध्य रेलवे, उत्तर पश्चिम रेलवे एवं पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे का विस्तार है। ऐसे में इन जोनों के मंडलों के तकरीबन 3500 पद सरेंडर किए जाएंगे। उत्तर रेलवे का लखनऊ व मुरादाबाद मंडल, पूर्वोत्तर रेलवे के तीनों लखनऊ, बनारस व इज्जतनगर मंडल, उत्तर मध्य रेलवे के तीनों प्रयागराज, झांसी व आगरा मंडल उत्तर प्रदेश की सीमा में आता है। इन मंडलों से पदों को सरेंडर किया जाएगा। रेलवे बोर्ड के मानव संसाधन नियोजन निदेशक अमित सिंह मेहरा ने जारी आदेश में सभी रेलवे जोन से कहा है कि कटौती संबंधी जानकारी तीन महीने के अंदर दें। प्रक्रिया मानव संसाधन प्रबंधन प्रणाली(एचआरएमएस) के जरिए पूरी करनी होगी। उन्होंने कहा है कि कटौती का लक्ष्य वार्षिक समझौता ज्ञापन के तहत तय किया गया है।
आरडीएसओ में भी कम होंगे 50 पद
उत्तर रेलवे में कुल 3303 पदों को सरेंडर किया जाएगा। सूत्रों के अनुसार इसमें लखनऊ व मुरादाबाद मंडलों में करीब 1500 पद शामिल होंगे। इसके अतिरिक्त पूर्वोत्तर रेलवे व उत्तर मध्य रेलवे के तीनों मंडल यूपी में आते हैं। ऐसे में क्रमश: 1194 व 1667 पदों को सरेंडर किया जाएगा। वहीं आरडीएसओ लखनऊ में है। यहां 2523 पद वर्तमान में हैं, जिसमें से 50 कम किए जाएंगे।पद सरेंडर के पीछे यह है दलील
रेलवे बोर्ड का मानना है कि इस फैसले से मौजूद मानव संसाधनों का बेहतर उपयोग और रेल परिचालन दक्षता में वृद्धि होगी। रेलवे बोर्ड प्रतिवर्ष लक्ष्य निर्धारित कर पदों का सरेंडर या पुनर्वितरण करता है। इससे विशेषकर गैर संरक्षित पद जैसे रसोइया, माली, सफाईकर्मी, बढ़ई सहित कई अन्य पद सरेंडर किए जा रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि पिछले दो साल पदों को सरेंडर नहीं किया गया है। अब दोबारा लक्ष्य रखे गए हैं।
प्रभावित होगा कामकाज
रेलवे अधिकारियों की मानें तो पदों के सरेंडर होने का असर कामकाज में भी नजर आएगा। स्वीकृत पदों के सापेक्ष दो प्रतिशत कटौती का सीधा असर कर्मचारियों और नई भर्तियों पर पड़ेगा। पहले से ही रिक्त पदों के सापेक्ष भर्तियां नहीं हो रही हैं। कर्मचारियों पर ओवरलोड है। इसका सर्वाधिक असर 2026 में निकलने वाली भर्ती पर पड़ेगा। कम पदों पर भर्ती होगी।




