भारत-अमेरिका साझेदारी गहरी, CDS अनिल चौहान की बैठक से रक्षा सहयोग को नया आयाम
संवाददाता
नई दिल्ली देश की स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने की दिशा में सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम कदम उठाया है। अदालत ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया है कि वे आईसीयू (गहन चिकित्सा इकाई) सेवाओं के लिए निर्धारित दिशानिर्देशों को लागू करने हेतु एक वास्तविक और व्यावहारिक कार्ययोजना तैयार करें

सुप्रीम कोर्ट का सख्त निर्देश
न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और आर. महादेवन की पीठ ने कहा कि आईसीयू सेवाओं के लिए जो दिशानिर्देश तैयार किए गए हैं, उन्हें सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ साझा किया जाए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि हर राज्य एक व्यावहारिक कार्ययोजना बनाए, जिसमें न्यूनतम मानकों को लागू करने की व्यवस्था हो।आईसीयू के लिए जरूरी मानक तय करने पर जोर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सबसे पहले पांच बुनियादी आवश्यकताओं को प्राथमिकता दी जाए, जिनमें स्टाफ और जरूरी उपकरण दोनों शामिल हों। अदालत ने यह भी कहा कि केवल दिशानिर्देश बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन और निगरानी की मजबूत व्यवस्था भी जरूरी है।एक हफ्ते में बैठक और रिपोर्ट की तैयारी कोर्ट ने निर्देश दिया कि सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी एक सप्ताह के भीतर बैठक करें और कार्ययोजना तैयार करें। इसके बाद तैयार रिपोर्ट केंद्र सरकार के स्वास्थ्य विभाग को भेजी जाएगी, जो इसे सभी राज्यों के साथ साझा करेगा। सुनवाई के दौरान यह सुझाव दिया गया कि भविष्य में नर्सिंग स्टाफ को आईसीयू प्रबंधन के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जाए, क्योंकि वे मरीजों के साथ लगातार रहते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इस सुझाव को स्वीकार करते हुए इसे ‘व्यावहारिक और आवश्यक’ बताया और भारतीय नर्सिंग परिषद को इस मामले में पक्षकार बनाया। अदालत ने निर्देश दिया कि संबंधित संस्थाएं अपने पाठ्यक्रम और प्रशिक्षण में सुधार की योजना पेश करें, ताकि प्रशिक्षित कर्मचारी आईसीयू जैसी गंभीर परिस्थितियों को बेहतर तरीके से संभाल सकें।




