बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के तहत शेरघाटी में अनुमंडल स्तरीय प्रशिक्षण, जागरूकता रथ रवाना

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ब्यूरो रिपोर्ट गया (संज्ञान दृष्टि)

शेरघाटी। बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति को समाप्त करने और बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से बुधवार को महिला एवं बाल विकास निगम, बिहार तथा कवच परियोजना (Centre DIRECT) के संयुक्त तत्वावधान में शेरघाटी प्रखंड सभागार में अनुमंडल स्तरीय एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें शेरघाटी अनुमंडल के सभी प्रखंडों की महिला पर्यवेक्षिकाओं ने भाग लिया।

 

कार्यक्रम में शेरघाटी के प्रखंड विकास पदाधिकारी, महिला एवं बाल विकास निगम की जिला परियोजना प्रबंधक (डीपीएम) जयवंती सिन्हा, जिला मिशन समन्वयक सुशांत आनंद सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

प्रशिक्षण के दौरान बाल संरक्षण, बच्चों के अधिकार, जोखिमग्रस्त बच्चों की पहचान, बाल विवाह के दुष्परिणाम तथा इसकी रोकथाम में आंगनबाड़ी सेविकाओं एवं महिला पर्यवेक्षिकाओं की भूमिका पर विस्तार से जानकारी दी गई। इस दौरान डीपीएम जयवंती सिन्हा ने सभी प्रतिभागियों को बाल विवाह रोकने और इसके विरुद्ध सक्रिय भूमिका निभाने की शपथ दिलाई।

इस अवसर पर बाल विवाह के खिलाफ जन-जागरूकता अभियान को गति देने के लिए जागरूकता रथों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। प्रखंड विकास पदाधिकारी एवं डीपीएम ने संयुक्त रूप से रथों को रवाना किया। ये रथ अनुमंडल के विभिन्न प्रखंडों की पंचायतों में पहुंचकर लोगों को बाल विवाह के कानूनी प्रावधानों, दुष्परिणामों तथा बेटियों की शिक्षा और सुरक्षित भविष्य के प्रति जागरूक करेंगे।

महिला एवं बाल विकास निगम के बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान एवं कवच परियोजना के संयुक्त प्रयास से संचालित यह अभियान ग्रामीण क्षेत्रों में बाल विवाह के विरुद्ध सामाजिक चेतना विकसित करने और सामुदायिक भागीदारी बढ़ाने पर केंद्रित है।

अभियान का संदेश है— बाल विवाह मुक्त पंचायत, सुरक्षित बचपन और शिक्षित बेटी ही सशक्त समाज की पहचान है।