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मोहन भागवत बोले- पश्चिमी चश्मा उतार लौटें अपनी जड़ों की ओर

संवाददाता
नागपुर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉक्टर मोहन भागवत ने बड़ा संदेश दिया है। नागपुर में ‘भारत दुर्गा मंदिर’ की आधारशिला रखने के पश्चात उन्होंने कहा कि भारत का विश्वगुरु बनना अब केवल एक कल्पना नहीं, बल्कि एक अटल सत्य है। उन्होंने देशवासियों से आह्वान किया कि वे भारत की प्रगति और सामर्थ्य को लेकर किसी भी प्रकार के संदेह को मन में स्थान न दें।
श्रीराम मंदिर का दिया उदाहरण
भागवत ने श्रीराम जन्मभूमि मंदिर का जिक्र करते हुए कहा कि एक समय था जब लोग अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर के निर्माण को लेकर संशय में रहते थे। इसे असंभव मानते थे। लेकिन आज वह मंदिर सबके सामने साक्षात खड़ा है। ठीक उसी प्रकार, भारत का विश्वगुरु के रूप में पुनरुत्थान भी पूरी तरह निश्चित है और इस यात्रा को रोका नहीं जा सकता।वर्तमान पीढ़ी में दिखेगा बड़ा परिवर्तन- भागवत आरएसएस के सरसंघचालक ने कहा कि भारत को वैश्विक मार्गदर्शक के रूप में स्थापित होते देखने का सौभाग्य इसी पीढ़ी को प्राप्त होगा। उन्होंने कहा कि निरंतर प्रयासों और सामूहिक अनुशासन के बल पर भारत इस सपने को साकार करेगा। भागवत के अनुसार, देशवासियों को अब अपने भीतर के संशय को त्यागकर साहस और आत्मनिर्भरता के मार्ग पर चलना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब हम इन मूल्यों को अपने दैनिक आचरण का हिस्सा बनाएंगे, तभी भारत एक मजबूत राष्ट्र के रूप में उभरकर पूरी दुनिया का मार्गदर्शन करने में सक्षम होगा।

पश्चिमी चश्मे को उतार फेंकने की जरूरत- भागवत
डॉक्टर भागवत ने कहा कि भारत को यदि वास्तव में समझना है, तो इसे इसकी अपनी सभ्यता और सनातन मूल्यों की दृष्टि से देखना होगा। उन्होंने कहा कि पिछले 150 वर्षों में विकसित हुई पश्चिमी सोच से भारत को नहीं समझा जा सकता। नागरिकों को इस विदेशी विचारधारा की परतों को उतार फेंकना होगा।

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