देववाणी मंत्रों और काव्यधारा से गूंजा ऐतिहासिक दशहरा मेला चतुर्थ दिवस
संस्कृत कवि सम्मेलन में साहित्यिक विरासत का गौरवगान, तीन समाजसेवी विभूतियां सम्मानित

प्रांजल श्रीवास्तव संपादक
लखीमपुर-खीरी (संज्ञान दृष्टि)। भारतीय संस्कृति की सनातन चेतना, साहित्य की गरिमा और देववाणी संस्कृत की मधुर काव्यधारा से लखीमपुर का ऐतिहासिक दशहरा मेला चौथे दिन सराबोर हो उठा। संस्कृत कवि सम्मेलन में श्लोकों और काव्यात्मक अभिव्यक्तियों ने वातावरण को आध्यात्मिक एवं साहित्यिक गरिमा से आलोकित कर दिया।


कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि धौरहरा विधायक विनोद शंकर अवस्थी, विशिष्ट अतिथि ब्लॉक प्रमुख दिव्या सिंह, नगर पालिका परिषद अध्यक्ष डॉ. इरा श्रीवास्तव तथा अधिशासी अधिकारी संजय कुमार ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। उद्घाटन सत्र का संचालन समाजसेवी एवं साहित्यकार राममोहन गुप्त ‘अमर’ ने किया। इस अवसर पर समाजसेवा में उल्लेखनीय योगदान के लिए युवराजदत्त महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य डॉ. डी. एन. मालपानी, संघ के सेवा प्रमुख आनंद अवस्थी तथा प्रमोद कुमार शर्मा को समाजसेवी सम्मान से विभूषित किया गया। कार्यक्रम के संयोजन में बृजेश पाल, राकेश कुमार, अनिरुद्ध त्रिपाठी, अजय अग्रवाल और सुरेन्द्र पाल ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस अवसर पर मेलाधिकारी समरा सईद, मेला अध्यक्ष रवींद्र रावत, सह अध्यक्ष नीलम रस्तोगी, शमीम बानो, इंजीनियर दुर्गेश वर्मा, राजकुमार त्रिवेदी, संजय त्रिवेदी, पं ओंकार नारायण दुबे, आचार्य पंकज कृष्ण शास्त्री, आचार्य संजय मिश्रा, सुरचना त्रिवेदी सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे। इस दौरान संस्कृत विद्यालय के बच्चों ने खूबसूरत प्रस्तुति भी दी। संस्कृत भारती अवध प्रांत द्वारा संस्कृत कवि सम्मेलन ने संदेश दिया कि अपनी प्राचीन भाषायी विरासत का संरक्षण और समाजसेवियों का सम्मान ही सांस्कृतिक चेतना को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम है।




