लखीमपुर खीरी

पांचवें दिन पंजाबी संस्कृति के रंगों में सराबोर हुआ मेला परिसर, सुर-संगीत और सम्मान समारोह ने सजाई सांस्कृतिक संध्या

स्पर्श सिन्हा, कार्यकारी सम्पादक

लखीमपुर-खीरी। ऐतिहासिक दशहरा मेला केवल आस्था और परंपराओं का उत्सव ही नहीं, बल्कि विविध संस्कृतियों, लोककलाओं और सामाजिक समरसता का जीवंत संगम भी है। इसी सांस्कृतिक विरासत को नई ऊर्जा और नई पहचान देते हुए नगर पालिका परिषद लखीमपुर द्वारा आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला के पांचवें दिन पंजाबी संगीत सम्मेलन धूमधाम से संपन्न हुआ। पंजाबी संस्कृति के उल्लासपूर्ण रंगों, मधुर गीतों, जोशीले भांगड़े और मनमोहक नृत्य प्रस्तुतियों ने ऐसा समां बांधा कि पूरा मेला परिसर संगीत और उत्साह की तरंगों से सराबोर हो उठा।


कार्यक्रम का शुभारंभ नगर पालिका परिषद की अध्यक्ष डॉ. इरा श्रीवास्तव, अधिशासी अधिकारी संजय कुमार, मुख्य अतिथि वरिष्ठ पत्रकार नंद कुमार मिश्रा, विशिष्ट अतिथि प्रधान अनुश्री जायसवाल तथा अन्य गणमान्य अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। उद्घाटन सत्र में भारतीय संस्कृति की विविधता, लोकपरंपराओं के संरक्षण और सामाजिक एकता में ऐसे आयोजनों की महत्ता भी परिलक्षित हुई। कार्यक्रम का प्रभावशाली संचालन समाजसेवी एवं साहित्यकार राममोहन गुप्त ‘अमर’ ने किया। पंजाबी संगीत सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में डॉ. एस.सी. मिश्रा, लल्लू राम शुक्ला, रमेश सविता और के.के. दीक्षित को विशिष्ट सम्मान से विभूषित किया गया। सम्मान समारोह ने आयोजन की गरिमा बढ़ाने के साथ ही समाज में उल्लेखनीय योगदान देने वाली विभूतियों के प्रति कृतज्ञता और सम्मान का संदेश दिया। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण कुलदीप गिल, रमनदीप गिल एंड पार्टी की शानदार प्रस्तुतियां रहीं। पंजाबी गीत-संगीत की मधुर धुनों, ऊर्जावान भांगड़े और आकर्षक नृत्य प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। पंजाबी लोकसंस्कृति की जीवंतता, उल्लास और उमंग से सजी प्रस्तुतियों ने दर्शकों को तालियां बजाने और उत्साह से झूमने पर विवश कर दिया। संगीत और नृत्य की इस सुरमयी संध्या ने यह संदेश दिया कि भाषा, क्षेत्र और परंपराओं की विविधता के बावजूद सांस्कृतिक अभिव्यक्तियां लोगों को आपस में जोड़ने का सशक्त माध्यम हैं। ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को देश की समृद्ध लोकपरंपराओं से परिचित कराने के साथ ही आपसी सद्भाव और सांस्कृतिक एकता को भी मजबूत करते हैं। कार्यक्रम को सफल बनाने में संयोजक मंडल के सदस्य विक्रम गुप्ता, कौशल तिवारी, अजय गुप्ता ‘लकी’, चंद्र प्रकाश धुरिया और मनोज कुमार का महत्वपूर्ण योगदान रहा। इस अवसर पर मेला अध्यक्ष रवींद्र रावत, मेला अधिकारी समरा सईद, नीलम रस्तोगी, शमीम बानो, बजरंग शर्मा, सुरेंद्र पाल, सर्वेश वर्मा, राकेश कुमार, दीपक रस्तोगी, अशोक ढल, सुरेंद्र मौर्य, चंद्र प्रकाश शुक्ला, इंजीनियर दुर्गेश वर्मा, शफीक, बृजेश पाल सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। ऐतिहासिक दशहरा मेले की यह सांस्कृतिक संध्या अपने पीछे उमंग, उल्लास और सद्भाव की यादगार छाप छोड़ गई। पंजाबी संगीत के सुरों में सजी इस शाम ने एक बार फिर साबित किया कि संस्कृति की असली शक्ति लोगों को जोड़ने, दिलों में अपनत्व जगाने और समाज में एकता के रंग भरने में निहित है।

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