आस्था, एकता और परंपरा के संगम से सजेगा श्री चित्रगुप्त कायस्थ सभा का वार्षिकोत्सव

अनिल कुमार श्रीवास्तव
लखीमपुर खीरी ( संज्ञान दृष्टि )। आस्था की अक्षुण्ण परंपरा, सामाजिक एकजुटता और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने के संकल्प के साथ श्री चित्रगुप्त कायस्थ सभा, लखीमपुर खीरी ने अपने आगामी आयोजनों की तैयारियों को गति प्रदान कर दी है। इसी क्रम में आज श्री चित्रगुप्त कायस्थ धर्मशाला में संस्था की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें आगामी वार्षिकोत्सव को भव्य, दिव्य और यादगार बनाने के लिए विस्तृत रूपरेखा तैयार की गई। बैठक की अध्यक्षता संस्थाध्यक्ष अनूप सिंह ने की। मुख्य अतिथि के रूप में संस्था के वरिष्ठ संरक्षक राजीव रत्न खरे तथा विशिष्ट अतिथिद्वय संरक्षक डॉ. ओपी श्रीवास्तव एवं शशिकांत श्रीवास्तव उपस्थित रहे। बैठक का संचालन महामंत्री रमेश पांडिया ने किया।

भगवान चित्रगुप्त की स्तुति के साथ प्रारंभ हुई बैठक में 15 नवंबर को आयोजित होने वाले संस्था के भव्य-दिव्य वार्षिकोत्सव की तैयारियों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। उपस्थित पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने आयोजन को गरिमामय, आकर्षक और स्मरणीय बनाने के लिए सामूहिक संकल्प लिया। बैठक में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि ऐसे आयोजन केवल उत्सव भर नहीं होते, बल्कि समाज को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने, आपसी सद्भाव को मजबूत करने और भावी पीढ़ी तक अपनी गौरवशाली परंपराओं को पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम भी हैं। संस्था के पदाधिकारियों ने बताया कि वार्षिकोत्सव से पूर्व 11 नवंबर को भाई दूज के अवसर पर शाम को कलम-दवात चौराहे पर पारंपरिक कलम-दवात पूजन किया जाएगा। यह आयोजन भगवान चित्रगुप्त के प्रति श्रद्धा और लेखनी के प्रति सम्मान की परंपरा को समर्पित होगा। कलम और दवात ज्ञान, विवेक, लेखन तथा कर्मों के लेखे-जोखे के प्रतीक हैं। ऐसे आयोजन समाज को अपनी सांस्कृतिक पहचान से जोड़ने के साथ ही परंपराओं के संरक्षण और सामाजिक एकता का संदेश भी देते हैं। बैठक में कोषाध्यक्ष लोकेंद्र श्रीवास्तव, रविकांत श्रीवास्तव, इंजीनियर राजेश श्रीवास्तव, मुकेश सक्सेना, रीना अस्थाना, मनीष श्रीवास्तव, नितिन श्रीवास्तव, संजय श्रीवास्तव, अनिल श्रीवास्तव सहित संस्था के अन्य सदस्य उपस्थित रहे। बैठक का समापन भगवान श्री चित्रगुप्त के जयकारों के साथ हुआ। उपस्थित सदस्यों ने आगामी आयोजनों को सफल बनाने के लिए उत्साहपूर्वक सहभागिता का संकल्प व्यक्त किया। आस्था की जड़ों से जुड़कर, एकता के सूत्र में बंधकर और अपनी गौरवशाली परंपराओं को आगे बढ़ाकर ही समाज अपनी विशिष्ट पहचान को और अधिक सशक्त बना सकता है। श्री चित्रगुप्त कायस्थ सभा का यह आयोजन इसी सांस्कृतिक चेतना, सामाजिक समरसता और सामूहिक संकल्प का प्रतीक बनने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।




