राज्यलखीमपुर खीरी

लखीमपुर दशहरा मेला में नवम दिवस पर नन्हे सितारों ने बिखेरा जलवा, सम्मानित हुए समाजसेवी

राष्ट्रीयता, सामाजिक चेतना और भारतीय संस्कृति के रंगों से सराबोर हुई नौवें दिन की संध्या, नवभारत पब्लिक स्कूल और नेशनल पब्लिक स्कूल ने मारी बाजी

स्पर्श सिन्हा, कार्यकारी संपादक

लखीमपुर खीरी (संज्ञान दृष्टि )। ऐतिहासिक लखीमपुर दशहरा मेला केवल मनोरंजन का उत्सव नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, सामाजिक समरसता और नई पीढ़ी की प्रतिभाओं को मंच प्रदान करने वाला जनोत्सव भी है। मेले के नौवें दिन आयोजित डॉ रवि श्रीवास्तव मेमोरियल, स्कूली बच्चों के सांस्कृतिक कार्यक्रम में नन्हे-मुन्ने कलाकारों ने अपनी मनमोहक प्रस्तुतियों से उपस्थित जनसमूह का मन मोह लिया। कहीं योग की साधना ने स्वस्थ जीवन का संदेश दिया, तो कहीं लोकगीतों और नृत्य की मनोहारी प्रस्तुतियों ने भारतीय संस्कृति की जीवंत छटा बिखेरी। राष्ट्रीयता, धार्मिक आस्था, सामाजिक जागरूकता और सांस्कृतिक चेतना से ओतप्रोत कार्यक्रम ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। यह कार्यक्रम डॉ. रवि श्रीवास्तव की स्मृति में आयोजित हुआ।


कार्यक्रम का शुभारंभ नगर पालिका परिषद की पालिकाध्यक्ष डॉ. इरा श्रीवास्तव, अधिशासी अधिकारी संजय कुमार, विशिष्ट अतिथि भाजपा महिला मोर्चा की जिलाध्यक्ष प्रतिमा सिंह भदौरिया तथा समाजसेवी पूजा सिंह ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया। उद्घाटन सत्र का कुशल संचालन समाजसेवी एवं साहित्यकार राममोहन गुप्त ‘अमर’ ने किया। इस अवसर पर अतिथियों ने बच्चों की प्रतिभा को प्रोत्साहित करते हुए ऐसे आयोजनों को उनके सर्वांगीण व्यक्तित्व विकास, आत्मविश्वास और रचनात्मक क्षमता के संवर्धन के लिए महत्वपूर्ण बताया। वास्तव में, जब बच्चों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के लिए मंच मिलता है, तो उनके भीतर छिपी संभावनाएं निखरकर सामने आती हैं और भविष्य के सशक्त, संस्कारवान नागरिकों की नींव मजबूत होती है। दशहरा मेले के सांस्कृतिक मंच पर नगर पालिका परिषद की ओर से समाज के प्रति उल्लेखनीय योगदान देने वाले आठ व्यक्तित्वों को विशिष्ट सम्मान प्रदान कर उनके सेवा-संकल्प का अभिनंदन किया गया। सम्मानित होने वालों में समाजसेवी एवं साहित्यकार राममोहन गुप्त ‘अमर’, प्रधानाचार्य रामचंद्र, नंद किशोर राही, गुड्डू, दीपक जौहरी, दीपक मिश्रा, बंटी शर्मा तथा डॉ. रुचि रानी गुप्ता शामिल रहे। इन सम्मान समारोहों ने यह संदेश दिया कि समाज की वास्तविक शक्ति उन व्यक्तित्वों में निहित है, जो अपने प्रयासों, सेवाभाव और समर्पण से दूसरों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का सतत प्रयास करते हैं। ऐसे व्यक्तित्वों का सार्वजनिक अभिनंदन समाज में सेवा, सद्भाव और रचनात्मक योगदान की भावना को प्रोत्साहित करता है। कार्यक्रम का अगला चरण जेसीआई के तत्वावधान में आयोजित बच्चों की सांस्कृतिक प्रतियोगिता के नाम रहा। विभिन्न विद्यालयों के विद्यार्थियों ने धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक विषयों पर आधारित प्रभावशाली प्रस्तुतियों के माध्यम से अपनी कला और कल्पनाशीलता का परिचय दिया।
योग, लोकगीत, नृत्य और जनजागरूकता से जुड़ी प्रस्तुतियों ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। बच्चों की प्रस्तुतियों में जहां भारतीय परंपराओं के प्रति सम्मान दिखाई दिया, वहीं राष्ट्रीय एकता, सामाजिक उत्तरदायित्व और जनचेतना का संदेश भी मुखर हुआ। प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने पूरे उत्साह, अनुशासन और आत्मविश्वास के साथ भाग लिया। मंच पर उनकी सहज अभिव्यक्ति, सामूहिक समन्वय और प्रस्तुति की जीवंतता ने साबित किया कि उचित मार्गदर्शन और अवसर मिलने पर नई पीढ़ी अपनी प्रतिभा से किसी भी मंच को गौरवान्वित कर सकती है। प्रतिस्पर्धात्मक मुकाबले के जूनियर वर्ग में नवभारत पब्लिक स्कूल ने शानदार प्रदर्शन करते हुए प्रथम स्थान प्राप्त किया, जबकि सरस्वती ज्ञान मंदिर, उपवेजा उपविजेता रहा। वहीं आइकॉन, नेशनल पब्लिक स्कूल तथा गुरु गोबिंद सिंह एकेडमी को सांत्वना पुरस्कार प्रदान किए गए। प्रतियोगिता में विद्यालयों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा देखने को मिली। बच्चों ने अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से न केवल कलात्मक कौशल प्रदर्शित किया, बल्कि टीम भावना, अनुशासन और सामूहिक प्रयास की महत्ता को भी रेखांकित किया। सीनियर वर्ग की प्रतियोगिता में नेशनल पब्लिक स्कूल ने उत्कृष्ट प्रदर्शन के दम पर विजेता बनने का गौरव हासिल किया, जबकि गुरु गोविंद सिंह एकेडमी उपविजेता रही। इस वर्ग में नवभारत पब्लिक स्कूल, एन.एस. गोल्डन फ्यूचर तथा ज्ञान दायिनी को सांत्वना पुरस्कार प्रदान किए गए। विजेता और उपविजेता विद्यालयों के विद्यार्थियों के उत्साह के साथ ही अन्य प्रतिभागियों के प्रयास भी सराहनीय रहे। प्रतियोगिता ने यह संदेश दिया कि सफलता का वास्तविक अर्थ केवल पुरस्कार प्राप्त करना नहीं, बल्कि पूरे मनोयोग से अपनी क्षमता को पहचानना, सीखना और निरंतर आगे बढ़ना भी है। प्रतियोगिता का आयोजन जेसीआई अध्यक्ष (2026) सचिन अग्रवाल, अध्यक्ष (2027) विश्वास सेठ तथा सचिव ऋतिक साहू की देखरेख में संपन्न हुआ। प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल में डॉ. रुचि रानी गुप्ता, जसविंदर कौर तथा डॉ. आकांक्षा त्रिपाठी शामिल रहीं। निर्णायकों ने प्रतिभागियों की प्रस्तुतियों का मूल्यांकन किया। सांस्कृतिक कार्यक्रम का संचालन राममोहन गुप्त ‘अमर’, आर्येंद्र पाल सिंह तथा विशाल सेठ ने किया। तीनों संचालकों ने अपने समन्वित प्रयासों से कार्यक्रम को व्यवस्थित और आकर्षक बनाए रखा। इस अवसर पर मेला अध्यक्ष रवींद्र रावत, मेला अधिकारी समरा सईद, नीलम रस्तोगी, शमीम बानो, राकेश कुमार, चंद्र कुमार धुरिया, बजरंग शर्मा, सर्वेश वर्मा, इंजीनियर दुर्गेश वर्मा, योगाचार्य प्रिंस रंजन बरनवाल, राजेश पटेल, कनिष्क बरनवाल, कुमार उत्कर्ष, सौरभ वर्मा, सौरभ गुप्ता, शुभम टंडन, अर्जित अग्रवाल, विकास टंडन, अर्चित महेंद्र, लवपुरी, सुमित शर्मा, अंकित मित्तल, मोहम्मद असद तथा शालिनी टंडन सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। स्वर्गीय डॉ. रवि श्रीवास्तव की स्मृति में आयोजित इस सांस्कृतिक कार्यक्रम में श्वेता शर्मा, नीलम रस्तोगी, सुरेन्द्र मौर्या, श्वेता यादव तथा ज्योति यादव सहित अन्य सहयोगियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। लखीमपुर के ऐतिहासिक दशहरा मेले की यह सांस्कृतिक संध्या अपने पीछे अनेक सुंदर स्मृतियां छोड़ गई। बच्चों की प्रस्तुतियों ने एक बार फिर यह विश्वास मजबूत किया कि संस्कृति से जुड़ी शिक्षा, सामाजिक चेतना और रचनात्मक अवसर मिलकर नई पीढ़ी को संवेदनशील, आत्मविश्वासी और जिम्मेदार नागरिक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। मेले के मंच पर गूंजती तालियों ने प्रतिभागियों का उत्साह बढ़ाया, तो सम्मान समारोह ने समाजसेवा की प्रेरणा को नई ऊर्जा दी। यह आयोजन इस बात का सशक्त उदाहरण बना कि जब परंपराओं की विरासत, समाजसेवा का संकल्प और बच्चों की प्रतिभा एक मंच पर मिलते हैं, तो उत्सव केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि समाज को नई दिशा देने वाला प्रेरणास्रोत बन जाता है।

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