अर्चित मोहन की कविताएं ‘सफ़र-ए-इश्क़’ काव्य संग्रह में शामिल
साहित्यिक योगदान के लिए बतौर सह-लेखक किए गए सम्मानित

स्पर्श सिन्हा कार्यकारिणी संपादक
लखीमपुर-खीरी (संज्ञान दृष्टि)। जनपद के युवा रचनाकार अर्चित मोहन को उनकी उत्कृष्ट रचनात्मकता और साहित्यिक योगदान के लिए प्रतिष्ठित राष्ट्रीय पब्लिकेशन हाउस ‘ज्ञानवृक्ष पब्लिकेशंस’ द्वारा ‘प्रकाशन प्रमाण पत्र’ देकर सम्मानित किया गया है। अर्चित मोहन को यह सम्मान वर्ष 2026 में प्रकाशित साझा काव्य संग्रह “सफ़र-ए-इश्क़” में बतौर सह-लेखक सम्मिलित होने पर मिला है।


साहित्यिक योगदान के लिए बतौर सह-लेखक किए गए सम्मानितल रूप से लखीमपुर के निवासी और वर्तमान में गुरुग्राम में कार्यरत अर्चित मोहन, जनपद के जाने-माने समाजसेवी व साहित्यकार राम मोहन गुप्त ‘अमर’ एवं सेवानिवृत्त प्रवक्ता अर्चना गुप्ता के सुपुत्र हैं। साहित्य जगत में अर्चित मोहन ‘गुस्ताख़ शब्द’ उपनाम से अपनी लेखनी का जादू बिखेर रहे हैं। नव-प्रकाशित पुस्तक “सफ़र-ए-इश्क़” में अर्चित की चार कविताएं “तुम”, “मुझे पता है”, “तुम्हारे गुलाब का रंग” और “जिंदगी में बहार” प्रकाशित हुई हैं। ज्ञानवृक्ष पब्लिकेशंस की संस्थापक पर्णिका गर्ग और सह-संस्थापक अभिनव पटेल ने अर्चित मोहन के समर्पण, संवेदनशीलता और अनूठे लेखन कौशल की प्रशंसा करते हुए उन्हें आधिकारिक प्रमाण पत्र जारी करते हुए उनके उज्ज्वल साहित्यिक व शैक्षणिक भविष्य की मंगलकामना की है। अर्चित मोहन की इस उपलब्धि पर साहित्यकारों, परिजनों और मित्रों ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उन्हें बधाई व शुभकामनाएं दी हैं।




