यूपी विधानसभा चुनाव से पहले आयोग का बड़ा निर्देश, तीन साल से तैनात अफसरों के होंगे तबादले
एक जिले में लंबे समय से तैनात अधिकारियों को हटाने की तैयारी, गृह जिले में तैनात चुनावी जिम्मेदारी वाले अफसर भी दायरे में

विशेष संवाददाता
नई दिल्ली (संज्ञान दृष्टि)। उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर निर्वाचन आयोग ने प्रशासनिक स्तर पर निष्पक्षता सुनिश्चित करने की दिशा में कदम तेज कर दिए हैं। चुनाव प्रक्रिया को पारदर्शी और स्वतंत्र बनाए रखने के उद्देश्य से चुनावी ड्यूटी से जुड़े अधिकारियों के तबादलों को लेकर निर्देश जारी किए गए हैं। इसके तहत एक ही जिले में निर्धारित अवधि से तैनात पात्र अधिकारियों को दूसरे जिले में स्थानांतरित किया जाएगा। साथ ही, अपने गृह जिले में तैनात ऐसे अधिकारियों को भी हटाने की व्यवस्था की गई है, जिनकी भूमिका चुनाव संचालन में महत्वपूर्ण है।

निर्वाचन आयोग की इस पहल का मुख्य उद्देश्य चुनाव के दौरान प्रशासनिक निष्पक्षता बनाए रखना और किसी भी अधिकारी के लंबे समय तक एक ही क्षेत्र में तैनात रहने से पक्षपात की आशंका को कम करना है। चुनाव के समय जिला प्रशासन और पुलिस विभाग की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में आयोग चाहता है कि निर्वाचन प्रक्रिया से जुड़े अधिकारी स्वतंत्र रूप से अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करें और किसी भी राजनीतिक दल या प्रत्याशी के प्रति पक्षपात की शिकायत की गुंजाइश न रहे।
जिला प्रशासन से पुलिस विभाग तक लागू होंगे निर्देश
तबादलों से संबंधित निर्देशों के दायरे में जिला निर्वाचन अधिकारियों और उपजिलाधिकारियों (एसडीएम) समेत कई श्रेणियों के अधिकारियों को शामिल किया गया है। इसके अलावा तहसीलदारों तथा पुलिस विभाग के इंस्पेक्टरों सहित चुनावी जिम्मेदारियों से जुड़े अन्य पात्र अधिकारियों की तैनाती और कार्यकाल की भी समीक्षा की जाएगी।
इन अधिकारियों का चुनाव प्रबंधन में सीधा या महत्वपूर्ण योगदान रहता है। जिला निर्वाचन अधिकारी निर्वाचन संबंधी व्यवस्थाओं की निगरानी करते हैं, जबकि एसडीएम और तहसील स्तर के अधिकारी विभिन्न प्रशासनिक दायित्वों का निर्वहन करते हैं। इसी तरह पुलिस अधिकारियों की जिम्मेदारी कानून-व्यवस्था बनाए रखने, संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी करने और मतदान के दौरान सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की होती है।
ऐसे में लंबे समय से एक ही जिले में तैनात अधिकारियों के स्थानांतरण को चुनावी व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। हालांकि, तबादलों का दायरा संबंधित अधिकारी के पद, चुनावी जिम्मेदारी और आयोग द्वारा निर्धारित पात्रता मानकों के आधार पर तय किया जाएगा।
31 मई 2027 की अवधि बनेगी आधार
अधिकारियों की तैनाती और कार्यकाल की समीक्षा के लिए 31 मई 2027 की अवधि को आधार बनाए जाने की जानकारी सामने आई है। इसके अनुसार, संबंधित अधिकारियों की जिले में तैनाती की अवधि का आकलन किया जाएगा। निर्धारित मानकों के अंतर्गत आने वाले अधिकारियों को तबादले की प्रक्रिया से गुजरना पड़ सकता है।
इस व्यवस्था में केवल वर्तमान तैनाती ही नहीं, बल्कि अधिकारी की चुनावी भूमिका और निर्धारित अवधि से जुड़े अन्य मानकों को भी ध्यान में रखा जाएगा। आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुरूप संबंधित विभागों को पात्र अधिकारियों का विवरण तैयार करना होगा। इसके बाद आवश्यकतानुसार तबादलों की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
निष्पक्ष चुनाव कराने पर आयोग का जोर
उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले प्रशासनिक मशीनरी को व्यवस्थित करना चुनाव आयोग की तैयारियों का अहम हिस्सा है। अधिकारियों की तैनाती में निर्धारित नियमों का पालन होने से चुनावी प्रक्रिया के दौरान पारदर्शिता बनाए रखने में मदद मिल सकती है। इसके साथ ही निर्वाचन संबंधी शिकायतों पर समयबद्ध कार्रवाई और कानून-व्यवस्था की प्रभावी निगरानी भी महत्वपूर्ण होगी।
आयोग की इस व्यवस्था से प्रशासनिक और पुलिस विभाग में तबादलों को लेकर गतिविधियां बढ़ने की संभावना है। हालांकि, किन अधिकारियों का तबादला होगा और किन्हें नियमों के तहत छूट मिलेगी, इसका निर्धारण आधिकारिक दिशा-निर्देशों तथा संबंधित अधिकारियों की पात्रता के आधार पर किया जाएगा।
फिलहाल, आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए अधिकारियों के कार्यकाल की समीक्षा और निर्धारित मानकों के अनुसार तैनाती में बदलाव को महत्वपूर्ण प्रशासनिक कदम माना जा रहा है। अंतिम निर्णय के लिए आयोग के आधिकारिक आदेश और संबंधित विभागों की ओर से जारी निर्देशों को आधार माना जाना आवश्यक होगा।




