19 CAG रिपोर्ट से दिल्ली विधानसभा में सरकार की निगरानी मजबूत, AAP पर अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता का निशाना

संवाददाता |
नई दिल्ली दिल्ली विधानसभा के आठवें कार्यकाल के छठे सत्र के सत्रावसान के बाद विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने आम आदमी पार्टी (AAP) पर विपक्ष की भूमिका को लेकर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यह बेहद चौंकाने वाली स्थिति है कि पूरे सत्र के दौरान नेता विपक्ष सदन में उपस्थित नहीं हुईं। सत्रावसान के समय भी नेता विपक्ष का नाम तक मौजूद नहीं था। इसके बावजूद विधानसभा ने बिना समय गंवाए चार विधेयक पारित किए और जनहित से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की। अध्यक्ष ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में विपक्ष की जिम्मेदारी सरकार को जवाबदेह बनाना है, लेकिन इस सत्र में विपक्ष की ओर से कोई प्रभावी जनहित का मुद्दा नहीं उठाया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष ने सदन में केवल हंगामा और अराजकता का माहौल बनाया। चावल फेंकने और आपत्तिजनक इशारे करने जैसे मामलों का भी उन्होंने उल्लेख किया।

तीन दिन में चार विधेयक, 13 घंटे 19 मिनट चली कार्यवाही
आठवीं विधानसभा का छठा सत्र तीन दिन चला। इस दौरान सदन की कुल कार्यवाही 13 घंटे 19 मिनट रही। गुप्ता के मुताबिक सत्र में आए सभी एजेंडे पर चर्चा हुई और चारों विधेयक पारित किए गए। उन्होंने कहा कि व्यवधान के बावजूद विधानसभा ने निर्धारित काम को बिना समय गंवाए पूरा किया।
10 साल में एक भी CAG रिपोर्ट नहीं, मौजूदा विधानसभा में 19 रिपोर्ट पेश
विधानसभा अध्यक्ष ने सदन की निगरानी भूमिका को मौजूदा विधानसभा की प्रमुख उपलब्धियों में शामिल किया। उन्होंने कहा कि आठवीं विधानसभा के छह सत्रों में अब तक 19 CAG रिपोर्ट सदन में रखी जा चुकी हैं। इसके विपरीत पिछली सरकार के कार्यकाल के दौरान करीब 10 वर्षों में एक भी CAG रिपोर्ट विधानसभा में पेश नहीं की गई थी।
गुप्ता ने कहा कि मौजूदा विधानसभा प्रशासन के कामकाज पर सूक्ष्म स्तर तक निगरानी रख रही है। इससे सरकारी विभागों की कार्यप्रणाली में सुधार और जवाबदेही बढ़ाने में मदद मिलेगी। सभी CAG रिपोर्ट पर संबंधित विभागों को कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
तीन दिन में 52 मामले नियम 280 के तहत उठे
अध्यक्ष के अनुसार, सत्र के दौरान तीन दिनों में 52 मामले नियम 280 के तहत उठाए गए। उन्होंने कहा कि सामान्य तौर पर एक दिन में करीब 10 मुद्दे उठाने का प्रावधान है, लेकिन सदस्यों को अधिक से अधिक जनहित के मामले उठाने का अवसर दिया गया। उन्होंने सदस्यों की उपस्थिति को भी संतोषजनक बताया। सत्तापक्ष के 48 में से करीब 44-45 सदस्य सदन में मौजूद रहे।
डेढ़ साल में छह सत्र, पिछली विधानसभा पर भी सवाल
विजेंद्र गुप्ता ने पिछली विधानसभा के कामकाज पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सातवीं विधानसभा में पांच सत्र भी पूरे नहीं हो सके थे, जबकि मौजूदा आठवीं विधानसभा ने करीब डेढ़ वर्ष में छह सत्र पूरे कर लिए हैं। उनके मुताबिक मौजूदा विधानसभा में विधायी कार्य को प्राथमिकता दी जा रही है और सदन लगातार काम कर रहा है।
विपक्ष के हंगामे पर बरती नरमी
अध्यक्ष ने कहा कि विपक्ष के हंगामे और अनुशासनहीनता पर कार्रवाई करने का अधिकार उनके पास था, लेकिन उन्होंने जानबूझकर नरमी बरती। उनका कहना था कि विपक्ष को भविष्य में संसदीय परंपराओं और मर्यादा का पालन करने का अवसर दिया जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि राजनीतिक विरोध लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन सदन की गरिमा बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है।
अग्निशमन विधेयक से सेवा को मिलेगी मजबूती
दिल्ली अग्निशमन सेवा विधेयक के पारित होने को भी अध्यक्ष ने महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि इस कानून से अग्निशमन सेवा को मजबूती मिलेगी। विधानसभा की भूमिका केवल कानून बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि वह सरकारी विभागों के कामकाज की निगरानी भी कर रही है। उन्होंने कहा कि लोक लेखा समिति (PAC) से भी विधानसभा को पूरा सहयोग मिल रहा है।




